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Monday, July 8, 2013

ख़्वाहिश



ख़्वाहिशें हैं दिल में कुछ बनने की
तमन्ना है ज़िन्दगी में कुछ पाने की।
शायद ये ख़्वाहिशें मेरी पूरी हो
क्योंकि सोच के दायरे से बनी है
ये एक ख़ूबसूरत-सी ख़्वाहिश।
इच्छा है तो सिर्फ सफलता की
जो तुफान की लहरों की तरह
उम्मीद बनके कभी न कभी
मेरी ज़िन्दगी में सच होने आएगी
क्योंकि है ये एक ख़ूबसूरत-सी ख़्वाहिश।

मैं वो नहीं




'उफ' तेरी ये मदहोश निगाहें
क्यों मेरा साथ कभी छोड़ती नहीं।
जब भी देखा है पलके उठाकर
अपने सिवा कोई नज़र आता नहीं।

न जाने ये आंखें क्या कहना चाहती है
'हाँ' खामोश तो कभी ये रहती नहीं।
तेरी आंखे मुझे एक ख़्वाब दिखाना चाहती है
मगर जुबाँ तेरा साथ देती नहीं।

खिंची चली आती हूँ मैं तेरी ओर
पर रोक लेता है मेरा ये दिल।
तूने किया नहीं इकरार कभी
इसलिए बस, दिल बार-बार यही दोहराता है... 
मैं वो नहीं,मैं वो नहीं।

Thursday, June 6, 2013

सच कहें तो बढ़े हैरान हैं हम।



सच कहें तो बढ़े हैरान हैं हम
अभी अपने ही रिश्तों से।
जिसपर भी करते हैं भरोसा
ना जाने क्यों वही देते हैं धोखा

कभी डरते थे दुनिया से हम
मगर आज खुद से ही डरते हैं
क्यों होता है ऐसा मेरे साथ
क्या मैं ना करूँ किसी से बात
सच कहें तो बढ़े हैरान हैं हम।

रिश्तों में ढला मेरा बचपन
आज रिश्तों से डर लगता है
मदद करने से पहले हर कोई
बीते वक़्त को खोजता है
सच कहें तो बढ़े हैरान हैं हम।

बढा ही अजीब सिस्टम लगता है मुझे
लोगों का लोगों से जुड़ने का,
उनके अनुभव से ज्यादा
उनके वज़ूद को सोचते हैं
सच कहें तो बढ़े हैरान हैं हम।