खालीपन में फिर से शब्द तराशने की उमीद को लेकर निकल चली हूँ। एक कोशिश है अपने दिल बात सुनने की.…
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Saturday, November 23, 2013
तुम
दीवाना बनाते हो आंखों से तुम
पागल करते हो अपनी बातों से तुम
आख़िर मेरे क्या लगते हो तुम
जितनी दूर जाती हूँ तुमसे
उतने ही पास आते हो तुम
कहना क्या चाहते हो तुम
समझाओ मुझे अपना हर इशारा
कुछ महसूस कराना चाहते हो मुझे
लेकिन कहने से पहले ही घबराते हो तुम
शायद, अपने ही किसी अहसास से डर जाते हो तुम।
किरण
पागल करते हो अपनी बातों से तुम
आख़िर मेरे क्या लगते हो तुम
जितनी दूर जाती हूँ तुमसे
उतने ही पास आते हो तुम
कहना क्या चाहते हो तुम
समझाओ मुझे अपना हर इशारा
कुछ महसूस कराना चाहते हो मुझे
लेकिन कहने से पहले ही घबराते हो तुम
शायद, अपने ही किसी अहसास से डर जाते हो तुम।
किरण
Sunday, November 17, 2013
राहुल आएगा आज बस्ती में
राहुल गांधी आया रे
वादा पुराना लाया रे
डंका बजा है बस्ती में
आया राहुल बस्ती में।
दो दिन से यहाँ हल्ला है
भारी राहुल का पल्ला है
आज ग्रामीण सेवा मद्दी है
हुयी परेशां पब्लिक है।
सड़क सफाई वाह जी वाह
वर्कर की धुलाई वाह जी वाह
सालों रहे जो सोये थे
आज काम पर आये हैं।
डंका सुन राहुल गांधी का
समां शांति का बंधा हुआ
हर कौने में पुलिस खड़ी
नज़र गढ़ाए पब्लिक पर।
पब्लिक मगर सब जानती है
देख पुलिस हर कौने पर
उनकी टोका-टाकी पर
उन्हें कोसती, फिर हस्ती हुयी गुज़रती है।
घर के बाहर पुलिस देखकर
मेरा मन पुलकित-सा होता
रहते जो ये ऐसे ही खड़े
न कोई चोरी होती, न कोई सम्मान को रोता।
किरण
आज सुबह घर से बाहर निकलते ही मेरे सामने कुछ नज़ारा बदला-सा ही था। राहुल गांधी के आने से पहले सुबह कुछ यूँ बदली होगी शायद पब्लिक ने भी नहीं सोचा था।
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